अधिकारों की खींचतान पर छलका कानूनमंत्री का दर्द

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(नई दिल्ली) – मुख्य न्यायाधीश ने भी दिया जवाब
। सरकार और न्यायपालिका के बीच अधिकारों को लेकर अक्सर खींचतान होती रहती है। रविवार को एक बार फिर इसकी झलक देखने को तब मिली, जब कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने यह कहा न्यायपालिका के हद से आगे बढ़ने के कारण, सरकार पर शक्ति के संतुलन का भारी दबाव निर्मित हो गया है। रविशंकर प्रसाद ने यह बात संविधान दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद, मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने इस बात का जवाब देने में देर नहीं लगाई। दीपक मिश्रा ने कहा सरकार शक्ति के वर्गीकरण को लेकर सहज नहीं है। उन्होंने कहा लोगों के मौलिक अधिकार से समझौता नहीं किया जा सकता। लोगों का अधिकार सर्वोपरि है। संविधान एक सुव्यवस्थित और जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट संवैधानिक संप्रभुता में विश्वास करता है।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा सरकार को किसी गणितीय फार्मूले के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कानून मंत्री की इस बात का भी खंडन किया कि न्यायपालिका अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जा रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के तहत मिले अधिकारों के अनुरूप ही काम कर रहा है। हम सभी कानून से बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा देश के हर नागरिक का यही धर्म है कि वह संवैधानिक धर्म का पालन करे। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के बीच नाजुक संतुलन को कायम रखना महत्वपूर्ण है। तीनों संविधान के अंग हैं।
उन्होंने कहा राज्य के तीनों अंगों को अपनी स्वतंत्रता को लेकर सचेत रहना चाहिए और अपनी स्वायत्तता की रक्षा करने का प्रयास करना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा हमारा संविधान गतिहीन नहीं है बल्कि एक जीवंत दस्तावेज है। कोविंद कहा अदालतों में सुनवाई भी, अगर संभव हो तो ऐसी भाषा में होनी चाहिए जिसे साधारण याचिकाकर्ता भी समझ सकें। उन्होंने राज्य की तीनों शाखाओं के बीच संवाद में संयम और विवेक की जरूरत पर बल दिया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यहां आए लोगों को संबोधित किया।