कुर्बानी -तीनों दोस्तों की देशभक्ति लाजवाब और बेजोड़ रही

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कुर्बानी -तीनों दोस्तों की देशभक्ति लाजवाब और बेजोड़ रही
कुर्बानी -तीनों दोस्तों की देशभक्ति लाजवाब और बेजोड़ रही

दादाजी हम तीनों पास हो गये.’सयाली खुश हो कर घर में घुसते हुए लॉन में बैठे दादाजी से बोली.साथ में पड़ौस में रहने वाले सान्याल और सौजन्य भी थे .तीनों एक ही मोहल्ले में अगल बगल में रहते है.सबसे बड़ी बात तीनों एक ही कक्षा में पढ़ते है.


वह तो मुझे मालूम ही था कि तुम लोग फेल होने वाले बच्चों में से नहीं हो.’दादाजी भी बच्चों की खुशी में शामिल होते हुए बोले.
यह देखिये दादाजी मेरा रिपोर्ट कार्ड.’सयाली अपना रिपोर्ट कार्ड आगे बढाती हुई बोली.
नहीं दादाजी पहले मेरा देखिये.’सान्याल और सौजन्य दोनों एक साथ बोले.
अरे झगड़ते क्यों हो तीनों के कार्ड एक साथ देख लेता हुं.’दादाजी तीनों के हाथ से कार्ड लेते हुए बोले.


हां यह ठीक रहेगा.’तीनों ने अपनी सहमति दी.
अरे वाह तीनों के नम्बर लगभग बराबर है.हो भी क्यों ना तुम तीनों पढ़ते भी तो एक साथ हो.लेकिन असली जवाबदारी कक्षा आठ पास करने के बाद ही आती हैं.अब तुम लोग हाई स्कूल में जाओगे.कौन कौन से विषय लेने के बारे में सोचा है तुम लोगों ने?’दादा जी ने तीनों से पूछा.


मैं तो टीचर बनना चाहती हुं दादाजी.’सयाली बोली क्योंकि एक टीचर वह दीपक है जो खुद जल कर दूसरों को ज्ञान का प्रकाश देते हुए मार्ग दर्शित करता है.इस प्रकाश के उजियारे में ही विद्यार्थी अपनी अपनी राह खोजते हुए मंजिल पाते है.’सयाली बोली.
वाह बहुत खूब सयाली मुझे विश्वास है कि तुम एक अच्छी टीचर बनोगी.आज टीचरों के बीच भयंकर व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा हो गई है.मुझे विश्वास है तुम शिक्षा का व्यवसायी करण ना करते हुए अपने मूल सिद्धांतों को याद रखोगी.’दादाजी ने कहा.


दादाजी किसी भी घर,समाज और राष्ट्र का मुख्य आधार होता है पैसा.मैं अपने पैसों से अपने राष्ट्र को एक मजबूत आधार देने की कोशिश करुंगा.मैं भविष्य में बिजनेस फील्ड में जाना चाहता हूं.’सौजन्य ने अपनी बारी आने पर बोला.

और सान्याल तुम अपने भविष्य के बारे में क्या सोचते हो?क्या करना चाहते हो?’दादाजी ने उत्सुकता से सान्याल की तरफ देखते हुए पूछा.
दादाजी मैं आप सब लोगों की रक्षा करना चाहता हुं.और इसके लिये मैं अपने देश की सीमा पर जाना पसंद करुंगा मतलब मैं आर्मी में जाना चाहता हूं.’सान्याल ने फौजियों वाले आत्मविश्वास से जवाब दिया.


बहुत खुशी हुई तुम लोगों के विचार जानकर.यह जानकर और भी अच्छा लगा की तुम लोगों के मन में देशप्रेम और देशसेवा दोनों ही भावनाएं है.ईश्वर तुम लोगों की इच्छा पुरी करें.’दादाजी तीनों की तारीफ करते हुए बोले.


हाई स्कुल में प्रवेश लेने पर तीनों को एक बार फिर से एक ही क्लास मिली.तीनों गंभीरता से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते चले गए.दसवीं बोर्ड की परीक्षा में तीनों ने अपनी अपनी आशा के अनुरुप प्रदर्शन किया.अब समय था अपने अपने विषय चुनने का.


अब तक सयाली का विचार शिक्षक बनने का ही था.किन्तु वह सान्याल को मन ही मन चाहने लगी थी और वह अधिक से अधिक उसके समीप अधिक से अधिक उसके समीप रहना चाहती थी.इसी कारण उसने बायोलॉजी सब्जेक्ट लिया था क्योंकि सान्याल मैथ्स ले रहा था.सयाली का इरादा पहले आर्ट्स लेने का था.

चुंकि विज्ञान के सभी विद्यार्थी एक साथ ही बैठते थे सिर्फ मुख्य विषयों के लिये ही अलग अलग क्लासेस लगती थी.सयाली ज्यादा से ज्यादा समय सान्याल के साथ ही बिताती.एक दिन मौका पड़ने पर सयाली ने अपने मन की बात सान्याल के सामने रख दी.सान्याल ने भी सयाली के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.


सौजन्य ने कॉमर्स विषय लिया था.उसकी कक्षाऐं पूरी तौर पर अलग हो चुकी थी.लेकिन जीवंत सम्पर्क होने के कारण वह दोनों के बीच की बात को अच्छे से जानता था.
सान्याल ने बारहवीं के बाद इंजीनियरिंग की मैकेनिकल ब्रांच जॉइन कर ली.सयाली का चयन मेडिकल कॉलेज में हो गया.सौजन्य बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स करने चला गया.


इंजीनियरिंग कम्पलीट होते ही सान्याल की मेहनत रंग लाई और उसका चयन भारतीय सशस्त्र सेना के लिये हो गया.उसे ट्रेनिंग के पश्च्यात ऑन फील्ड टैंकों आदी के मेंटेनेंस का काम मिला.उसे मॉक ड्रिल के माध्यम से फील्ड टू वार की स्पेशल ट्रेनिंग तो दी ही गई थी.


इधर सयाली ने भी अपने आप को मानसिक रुप से इस प्रकार ढ़ाल लिया था कि वह स्वयं भी सान्याल के जॉब में रुचि लेने लगी थी.इसी कारण से उसने स्कुल में एनसीसी भी ज्वाइन करी थी.पढ़ाई में अच्छी होने के कारण उसका चयन मेडिकल कॉलेज में हो चुका था.सान्याल के इंजीनियर बनते बनते तक सयाली भी डॉक्टर बन चुकी थी.


इन्हीं दिनों इंडियन आर्मी में डॉक्टर्स की भर्ती के लिये विज्ञापन निकला.सयाली का चयन भी आर्मी मेडिकल सर्विसेस में हो गया.


एक फिल्म का डायलॉग है अगर तुम किसी को शिद्दत से चाहो तो सारी कायनात तुम्हे उससे मिलाने में लग जाती है.यही सब इन दोनों के साथ भी हो रहा था.इसी कारण दोनों की नियुक्ति भी एक ही स्थान पर हो गई.दोनों की शादी में किसी तरह का कोई विरोध नहीं था अतः दोनों निर्बाध गति से मिलते रहते थे.उन दोनों के बीच आपसी संपर्क स्थापित भी हो चुका था.


बॉर्डर पर विरोधी सेना की हलचलें कुछ तेज हो गई थी.रोजाना होने वाली छोटी मोटी झड़पों ने अब गंभीर रुप लेना प्रारम्भ कर दिया था.विरोधियों द्वारा सीमा पर किये जा रहे लगातार आक्रमणों से सभी परेशान हो उठे थे.अन्ततः एक दिन युद्ध की घोषणा हो ही गई.


सान्याल को अपनी यूनिट के साथ आक्रमण के लिये फ्रंट पर जाना पड़ा.यह सान्याल के लिए गौरव की बात थी.यही उसके बचपन का सपना भी था.सान्याल का काम टैंकों को आक्रमण के लिये हर समय तैयार रखना और मैदान में आयी किसी भी तकनिकी खराबी को दुरुस्त करने का था.


धीरे धीरे युद्ध ने भीषण रुप धारण कर लिया.इतने भीषण युद्ध की अपेक्षा किसी को भी नहीं थी.


भारतीय सेना अपने शौर्य और पराक्रम से दुश्मनों छक्के छुड़ाते हुए आक्रमणों का भरपूर जवाब दे रही थी.रण में चारों और भारतीय विजय पताका फहरा रही थी.जैसा की युद्ध में होता है कई लोगों की जाने जाती है हजारों घायल व अपाहिज हो जाते है,इस युद्ध का नजारा भी ऐसा ही था.सयाली की टीम भी रेडक्रॉस के कैम्प में अपना काम पुरे मनोयोग से कर रही थी.


घायल सैन्यकर्मियों को प्राथमिक चिकित्सा देना तथा उन्हें कोशिश करके वापस युद्ध भूमि में पहुँचाना डॉक्टर्स का मुख्य काम था.आठ दिन बीत चुके थे और युद्ध अपनी चरम सीमा पर.भारतीय सेना हर मोर्चा फतह करती जा रही थी.सान्याल की टुकड़ी भी बहुत बहादुरी से विजयपथ पर बढ़ती जा रही थी.


सर हमारे सबसे आगे बढ़ चुके टैंक में कुछ तकनिकी खराबी आ गई है और हम उसे ऑपरेट नहीं कर पा रहे है.’एक सैनिक ने आ कर सान्याल को सूचना दी.


ओह,तो उसे तुरंत दुरुस्त करना होगा.अन्यथा हमारा आगे बढ़ना मुश्किल होगा और इस स्थिति का दुश्मन फायदा भी उठा सकता है.’सान्याल बोला.


यस सर.’जवान बोला ‘और एक फ्रंट पर पिछड़ने के कारण बाकी लोगों को हमारी मदद के लिये आना पड़ेगा ऐसे में स्थितियां हमारे लिये विपरीत भी हो सकती है.’
कई बार लगातार उपयोग करने के कारण अत्यधिक ऊष्मा पैदा होती है और इस कारन ब्लास्ट पाउडर के कुछ अंश वहीं पर रह जाते है जो स्वाभाविक भी है.ऐसे में कई बार स्प्रिंग जाम भी हो जाती है.उस स्रिंग को साफ कर पर्याप्त लुब्रिकेशन करना होगा.’सान्याल बोला.


सर दुश्मन के आक्रमण बहुत खतरनाक होते जा रहे है और बिना रुके गोले बारुद बरसाये जा रहे है.हमारे सैनिक भी पुरी बहादुरी से डटे हुए है.अभी दोपहर के दो बज रहे है और इस स्थिति में हम उन्हें छह सात घंटे आगे बढ़ने से रोक सकते है.यदि संभव हो तो हम टैंक को रात में दुरुस्त कर ले?उस समय आक्रमणों की तीव्रता भी काफी कम होगी.’एक सहायक ने सुझाव दिया.


जैसा हम सोच रहे है शायद वैसा ना हो.स्प्रिंग के अलावा कुछ और समस्या हुई तो उसका सामान मुख्य स्टोर में से बुलवाना पड़ेगा ऐसे में काफी समय गुजर जायगा.इसीलिये हमें एक क्षण भी नहीं गंवाना चाहिये.साथ ही देरी करने से हमारे जवानों की मनोस्थिति पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है.’सान्याल बोला.
लेकिन सर हम तो वैसे ही दुश्मन की जमीन पर काफी अंदर तक घुस आये हैं.हमारे पास खोने के लिये कुछ भी नहीं है.’दूसरा सहयोगी बोला.


जीती हुई जमीन अब हमारी हो चुकी है.इसे जीतने के लिए हमारे कई सैनिकों ने खून बहाया है कई ने अपनी जान तक कुर्बान कर दी है.मैं उनकी कुबानियों को व्यर्थ नहीं जाने दे सकता.अपनी जीती हुई जमीन का एक इंच हिस्सा भी दुश्मन को नहीं दे सकता.’सान्याल पूरे जोश में बोला.
आपका कहना ठीक है सर.मगर अपनी हार से दुश्मन बहुत उग्र हो चुका हैं.’सहायक बोला.


मेरे बचपन का सपना था मातृभूमि पर शहीद होने का.अगर ऐसा हो जाता है तो मुझे अपने आप पर गर्व होगा.अगर हम सोच रहे है वैसा ही हुआ तो टैंक को दुरुस्त करने में ज्यादा से ज्यादा डेढ़ घंटा ही लगेगा.इस काम में मुझे दो सहायकों की जरुरत पड़ेगी.कौन है वह दो जांबाज़ जवान जो अपने देश की खातिर अपनी जान की बाज़ी लगाने को तैयार है.’सान्याल ने अपनी टुकड़ी के सैनिकों की तरफ देखते हुए पूछा.


हम तैयार है.’सारी टुकड़ी भरपुर जोश के साथ बोली.’भारत माता की….जय.’
सान्याल अपने दो जोशीले सहायकों को लेकर टैंक को दुरुस्त करने सीमा की तरफ चल दिया.
दोनों तरफ की प्लेटें जल्दी से खोलों और एयरगन की मदद से स्प्रिंग की सफाई करों.फिर अंदर घुस कर उसे प्रोपरली लुब्रिकेट करो.’सान्याल ने साथियों को निर्देश दिये व खुद भी औजार ले कर काम में जुट गया.


तीनों तरफ भीषण युद्ध चल रहा था.बाकी टुकड़ियों ने सान्याल को प्रोटेक्ट भी कर रखा था.
अंततः लगभग एक घंटे की जद्दोजहद के पश्च्यात रण के मैदान में खड़े उस टैंक को दुरुस्त करने में सान्याल और उसके साथियों को सफलता मिल ही गई.सान्याल ने खुद उस टैंक से आक्रमण की कमान संभाल ली ताकि टैंक में और कोई तकनिकी समस्या हो तो उसे भी दूर किया जा सके.


अभी टैंक को ऑपरेशन में लिये पांच सात मिनट ही बीते थे की दुश्मन की तरफ से फेंका गया एक बम सान्याल निकट गिर कर फट गया.जिस तरफ सान्याल था उस तरफ उसके अतिरिक्त कोई और जवान मौजूद नहीं था.फेंका गया बम सान्याल को निशाना बना का ही फेंका गया था.विस्फोट इतना जबरदस्त था कि सान्याल के शरीर के चीथड़े उड़ गये.शायद ईश्वर ने उसकी मनोकामना सुन ली और और वह देश के लिये शहीद हो गया.


सयाली को जब यह सूचना मिली तब किसी घायल का इमरजेंसी ऑपरेशन कर रही थी.खबर पाते ही वह धम्म से कुर्सी पर बैठ गई.वह अपनी उजड़ी दुनिया के लिये रोना चाहती थी.मगर सामने पड़े घायल को प्राथमिकता देते हुए उसके ऑपरेशन में जुट गई.ऑपरेशन करके निकली ही थी की उसके कंधे पर किसी ने स्नेह पूर्वक हाथ रख दिया.
वेलडन डॉक्टर सयाली.तुम न सिर्फ एक बहादुर फौजी की साथी हो बल्की खुद भी एक बहादुर और कर्तव्यनिष्ठ देशभक्त हो.’यह सयाली का सीनियर डॉक्टर था जो उसे दिलासा देने के लिए बाहर खड़ा था.


वह खुद शहीद हो कर देश की सेना को आगे बढ़ने का रास्ता दे गया.’डॉक्टर के साथ आये तीन चार अफसरों में से एक अफसर बोला.


अगर सान्याल चाहता तो टैंक के मेंटनेंस का काम रात तक के लिये भी रोक सकता था.लेकिन उसने अपने स्वयं की चिंता ना करते हुए अपने देश को आगे रखा.हज़ारों हजार सलाम है उस जांबाज़ को.’दूसरा अफसर सयाली को ढांढस बंधाते हुए बोला.


देखो डॉक्टर सान्याल ने तो अपने देशप्रेम की परीक्षा अव्वल नम्बर से पास कर ली.मगर अब एक अहम परीक्षा तुम्हें देनी है.’आये हुए सभी अफसरों में से सबसे सीनियर डॉक्टर ने कहा.
परीक्षा?मुझे?’सयाली ने अपने आंसुओं और जज्बातों को रोकते हुए पुछा.
हां,सयाली जिस बम के फटने से सान्याल की मौत हुई थी उस बम के फेंकने वाला व्यक्ति भी सान्याल के आक्रमण से घायल हो गया है और हम उसे उठा कर यहां ले आये हैं.’सैन्य अधिकारी बोला.


मैं अभी उस आदमी की जान ले लेती हुं,सर.इस परीक्षा में मैं सौ प्रतिशत खरी उतरुंगी.प्लीज मुझे परमिट कीजिये सर.’सयाली प्रतिशोध की भावनाओं के वेग में बहती हुई बोली.
नहीं सयाली परीक्षा यह नहीं है.यह काम तो हम फील्ड पर भी कर सकते थे.’साथ आया हुआ दूसरा अधिकारी बोला.


परीक्षा यह है कि तुम्हे इसे हर हाल में जीवित रखना है.’मुख्य अधिकारी बोला.


क्यों यही जानना चाहती हो ना तुम.’एक अधिकारी बोला’क्योंकि हमें शक है कि दुश्मन की फौज की वर्दी में कई आतंकी समूह भी दुश्मन का साथ दे रहे है.और यह आदमी इस बारे में कई सूचनाऐं अपने साथ रखता है.वह सभी सूचनाऐं हमें मिल जाए तो हमें काफी आसानी होगी.हम सटीक जगहों पर निशाना लगा सकेंगे और कई निरीह लोगों की जान बचा सकेंगे.मोर ओवर हम अपने पॉइंट्स को ज्यादा स्ट्रॉन्ग्ली यू एन ओ में रख पाएंगे.’

एक देशप्रेम वह होता है जो अपनी जान दे कर भी दुश्मन को आगे नहीं बढ़ने देता.दूसरा देशप्रेम यह होता है जो दिखाई नहीं देता लेकिन कई लोगो की जान बचाने में मदद करता है.तुम्हारे केस में यह एक भावनात्मक प्रतिशोध तो होगा ही साथ मैं सान्याल को सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी.’सर्वोच्च अधिकारी सयाली को समझाता हुआ बोला.

वह इस प्रकार की ट्रेनिंग से गुजरा हुआ होगा की वह कठोर शारीरिक यातनाऐं सह कर भी अपना मुंह नहीं खोलेगा.अतः तुम्हे ना सिर्फ उसकी जान बचानी है बल्कि अपने प्रेम से उसके राज भी उगल वाने होंगे.’अधिकारी ने सयाली को निर्देश दिये.


यह तो बहुत मुश्किल परीक्षा है लेकिन सान्याल की मौत का बदला लेने के लिये मैं यह चुनौती स्वीकार करुंगी.’सयाली अपने जज्बातों पर नियंत्रण रखते हुए बोली.
गुड द थिंग्स वेर एक्सपेक्टेड फ्रॉम यू.’अधिकारी प्रशंसात्मक स्वर में बोला.
मे गॉड हेल्प यू.’दूसरा अधिकारी बोला.

कीप इमोशंस अंडर कण्ट्रोल एंड गो अहेड.’सीनियर डॉक्टर बोला.
यस सर.’कहते हुए सयाली उस पेशेंट के पास चली गई.
उसकी हालत सचमुच बहुत गंभीर थी.दोनों पैर गंभीर रुप से चोटग्रस्त थे और फ्रेक्चर भी हो चुका था.उसके बचने की सम्भावनाऐं बहुत ही कम थी.सयाली तुरंत अपने काम में जुट गई .उसने उस घायल के सभी जख्मों को अच्छी तरह से धो कर साफ किया,खून रोका और दवाईयां चालु कर दी.

मैडम इसका खून काफी बह चुका है इसे तुरंत खून चढ़ाना होगा.’सहायक डॉक्टर बोली.


ब्लड बैंक से ले कर तुरंत ब्लड चढ़ाओ.’सयाली ने निर्देश दिया.
अगले दो दिनों में उसे तीन यूनिट ब्लड दिया जा चुका था.निरंतर सजग निगरानी से उस आदमी का शरीर कुछ कुछ प्रतिक्रियाएं देने लगा था.यद्यपि होश अभी भी नहीं आया था.
वेरी गुड डॉक्टर सयाली अब घायल की कंडीशन कैसी है?कितनी होप है इसके बचने की?’सीनियर अफसर उस आदमी को घायलों के कैम्प में देखते हुए बोले.


सर पहले से बेहतर है अब.कुछ रिस्पॉन्ड भी करने लगा है.आज शाम तक होश आ जाना चाहिए.इतना तो निश्चित है अब मैं इसे मरने नहीं दुंगी.’सयाली ने जवाब दिया.
‘आई एम प्राउड ऑफ़ यू सयाली.तुम्हे अपना मिशन तो याद है ना?’अफसर ने पुछा.
‘जी,बिलकुल याद है.दुश्मन की मौत से ज्यादा उसकी जिंदगी इम्पोर्टेन्ट है हमारे लिये.’सयाली ने जवाब दिया.
‘करेक्ट.’अफसर बोला.
डॉक्टर,उस विदेशी पेशेंट को और खून देना पड़ेगा.’सहायक डॉक्टर घायल की रिपोर्ट देखते हुए बोला.


इसका और मेरा ब्लड ग्रुप एक ही है.ऐसा करो यह फाइनल यूनिट मेरा ब्लड दे दो.’सयाली ने कहा.
लेकिन डॉक्टर ब्लड बैंक में इस ग्रुप का पर्याप्त ब्लड मौजूद है.आप फालतू में क्यों अपना ब्लड वेस्ट कर रही है इस दुश्मन के लिये.’सहायक डॉक्टर बोला .
कई दिनों से आराम नहीं मिला है शरीर को इस बहाने से शरीर को भरपूर आराम मिल जायेगा.’सयाली बोली.


सयाली का खून चढ़ने के बाद ही लगभग चार घंटे में उस घायल को होश आने लगा.
यह कौनसा मेडिकल कैंप है?’उस घायल ने होश में आते ही पहला प्रश्न किया.
आप इंडियन आर्मी के मेडिकल कैंप में है जनाब.’सयाली ने नम्र स्वर में जवाब दिया.
तुम लोगों ने मुझे मार क्यों नहीं डाला?मैं तुम लोगों के मनसूबे बहुत अच्छी तरह से जानता हूं.’वह आदमी गुस्से में बेड से उठने की कोशिश करता हुआ बोला.


वैसे तो वार का डिसिप्लीन यही कहता है कि दुश्मन को उसी समय मार देना चाहिये क्योंकि जख्मी दुश्मन ज्यादा खतरनाक होता है.लेकिन हमारी मेडिकल रिलीफ टीम के लोग रात के अंधेरे में गलती से अपना आदमी समझ कर यहां ले आये.’सयाली ने उस घायल को मेडिकल कैंप में लाने का कारण बतलाया.


लेकिन दिन के उजाले में तो मुझे मार सकते थे.मुझे इस तरह जिन्दा रखने का कारण क्या है मैं खूब जानता हूं.’घायल ऊंची आवाज में बोला.
इस कैंप में आने के बाद हम अपनी मेडिकल ओथ से बंध जाते है.जिसमें एक इंसान सिर्फ इंसान होता है.दोस्त या दुश्मन नहीं.उस इंसान को बचाना हमारा पहला फर्ज़ होता है.’सयाली भरपूर नरमी और संयम से बोली.यद्यपि उसके सीने में बदले की आग धधक रही थी.

मैं तुम लोगों के मंसूबे बेहतर ढंग से जानता हूं,डॉक्टर.तुम मुझे जिन्दा रख कर मुझसे हमारी सेना के राज उगलवाना चाहती हो?मगर यह फौजी टूटने वाला नहीं है.’वह घायल बोला.
‘फौजी पहले एक इंसान है.वह इंसान जो किसी का बेटा हैं,किसी का शौहर है,किसी मासूम का पिता है.और यह इंसान जिसके दोनों पैरों में प्लास्टर चढ़ा है मेरा भाई है.’सयाली उसी नरमी के साथ मुस्कुराते हुए बोली.


भाई?ओह तो राज उगलवाने के लिये रिश्तेदारी भी जोड़ ली.’घायल कड़वे स्वर में बुरा सा मुंह बना कर बोला.
नहीं भाई जान यह बात बिलकुल सच है.अगर ऐसा ना होता तो मैं तुम्हे अपना खून क्यों देती.पहली नजर में ही मुझे तुम्हारी शकल अपने भाई की कॉपी लगने लगी जो अभी दो साल पहले ही कैंसर से लड़ते हुए मर गया.हु ब हू तुम वही हो.मैं अपने एक भाई को खो चुकी हूं इस कारण दूसरे भाई को खोने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही हूं.’कहते कहते सयाली की आंखो में आंसू आ गये और वह सुबक सुबक कर रोने लगी.


शायद सयाली के इन आंसुओ का असर उस घायल पर होने लगा था.
क्या तुम सच कह रही हो?क्या मैं सचमुच तुम्हारे भाई जैसा हूँ?’वह घायल सयाली के आंसू देख कर पिघलता हुआ बोला.
हाँ,भैया.’सयाली आँखों में आंसू लिये बोली.
तब तो तुम मुझे अपने वतन जिन्दा भेजोगी यह वादा करो.’घायल भी अपनी तरफ से चाल चलता हुआ बोला.


सयाली कुछ जवाब देती इससे पूर्व ही उसके मोबाइल की घंटी बज उठी.वह बात करने के लिये वहां से उठ कर कुछ दूर चली गई लेकिन उसकी आवाजें स्पष्ट सुनाई दे रही थी.
हां,सौजन्य बोलो.’सयाली ने फोन उठाते हुए कहा.’हां तुमने सही सुना है.सान्याल अब हमारे बीच नहीं रहा.’घायल के कानों में सयाली की आवाज स्पष्ट आ रही थी.

हिम्मत तो रखनी ही है सौजन्य.’सयाली की आंखों में आंसू थे और आवाज भर्रा रही थी.’जीना तो पड़ेगा ही सान्याल मुझे अकेला छोड़ कर कहां गए उनकी निशानी मेरे साथ मेरे पेट में है.लेकिन मैं खुद यह बात सान्याल को बताती इससे पहले ही वह शहीद हो गया.’सयाली के सुबकने की आवाज तेज हो चली थी.’हां जरुर सौजन्य किसी सहायता की जरुरत होगी तो तुम्हे अवश्य बताऊंगी.’उधर से सौजन्य ने बाय कह कर फोन रख दिया.

और हाँ तुम्हे एक बात बताऊं सौजन्य’सयाली बनावटी बात करते हुए बोली’तुम्हे याद है ना भाई साहब की है.हां,हां वही एक ही तो थे.बिलकुल उनकी शकल हावभाव यहां तक की आवाज भी उनकी ही तरह है,जैसा एक पेशेंट भर्ती हुआ है.मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे भैया ही वापस आ गये है.मैंने अपना खून भी उन भैया को दिया है.चलो मैं फोन रखती हुं भैया का ड्रिप चेक करना है.’उस घायल तक यह बातें पहुंचाने के लिये ही सयाली थोड़ी लाउड वॉइस में बातें कर रही थी.


लीजिये भैया बातें करते हुए आधा घंटा कब बीत गया पता ही नहीं चला.आपके इंजेक्शन का टाइम भी हो गया है.’सयाली ने कैंप में प्रवेश करते हुए कहा.
‘क्या तुम्हारी शादी हो गई है?’उस घायल कैदी ने पूछा.
‘नहीं भैया अगले महीने होने वाली थी………..

मगर इस युद्ध में वह शहीद हो गये.’सयाली की आंखों में फिर आंसू आ गये.

और तुम उसके बच्चे की माँ बनने वाली हो?’उसने फिर प्रश्न किया.
जी,भैया.’सयाली यंत्रवत बोली.यद्यपि सयाली इस प्रश्न से बहुत आहत थी और इसी समय उसके प्राण लेना चाहती थी.वह पुरीतौर पर उस कैदी के प्रति घृणा से भरी हुई थी लेकिन देश की खातिर वह यथासंभव नरम रुख अपनाए हुए थी.


हमारे उधर तो ऐसी लड़कियों से शादी करने में बहुत परेशानी आती हैं.’वह बोला.
‘परेशानी तो हमारे यहां भी आती हैं,पता नहीं मेरा क्या होगा?’सयाली फिर फफक कर रो पड़ी.
‘देखो बहन मैं तुम्हारी परेशानी समझ सकता हूं.मेरी अपनी बहन के साथ भी इसी तरह का वाकिया हुआ था,और आखिर में उसे ख़ुदकुशी करनी पड़ी थी.’पहली बार उस कैदी ने सयाली से आत्मीयता से बात की थी.


मुझे भी शायद उसी रास्ते जाना पड़े.’अपना तीर सही निशाने पर लगता देख सयाली ने अपने आंसुओ का प्रवाह बढ़ा दिया.
तुम्हारा नाम क्या है बहन?’उस कैदी ने नरमी से पूछा.
मेरा नाम सयाली है.और भाई आपका?’सयाली ने पूछा.

मेरा नाम अशफ़ाक़ है.और मैं अपनी इस दूसरी बहन को ऐसे मरने नहीं दूंगा.अभी जो फोन आया था वह किसका था?’अशफ़ाक़ ने पूछा.
वह हमारे बचपन का दोस्त है.हम तीनों एक ही क्लास में साथ साथ पढ़ते थे.अब उसका काफी बड़ा बिजनेस है.’सयाली ने बताया.


क्या उसकी शादी हो गई है ?’अशफ़ाक़ ने पूछा .


नहीं अभी नहीं.’सयाली ने उत्तर दिया.
जिस अंदाज़ में तुम उससे बातें कर रही थी उससे लगता है वह तुम्हारे काफी करीब है.मैं चाहता हुं कि वह तुमसे शादी कर ले.कम से कम मेरी एक बहन तो जिन्दा रहे.बदले में मैं तुम्हारे अफसरों को वह सभी बातें बता दूंगा जो वह मुझ से जानना चाहते है.क्योंकि मुझे जिन्दा रखने का मतलब मैं अच्छी तरह समझता हूं.लेकिन मेरी शर्त यही है कि शादी मेरी आँखों के सामने होगी.’अशफ़ाक़ ने अपनी कुटिल चाल चली,क्योंकि उसे यकीन था कि सयाली और सौजन्य दोनों ही इस प्रस्ताव को नहीं मानेंगे.


क्या?’सयाली आश्चर्य से बोली.
‘हाँ,मैं अल्लाह की क़सम खा कर कहता हुं कि एक भी इनफार्मेशन गलत नहीं दूंगा.’अशफ़ाक़ दोनों हाथों को आसमान की तरफ उठा कर बोला.

भारतीय सेना के लिये उसके द्वारा दी गई सूचनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है सयाली.तुम अपने दोस्त को बुलवा लो हमें राज जल्दी से जल्दी उगलवाने के लिये यह नाटक करना ही पड़ेगा क्योंकि युद्ध नियमों के तहत हम उस पर इस स्थिति में हम उस पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल नहीं कर सकते.और उसके पूर्ण स्वस्थ्य होने में काफी समय भी लग जायगा.’आर्मी के अफसर सयाली से कह रहे थे.

परन्तु इस बात की क्या गारंटी है कि उसकी बात पूरी होने के बाद अशफ़ाक़ सच ही बोलेगा?’सयाली ने प्रश्न किया.


तुम्हारा शक सही है.अगर उसकी सूचनाऐं गलत निकली तो हमें युद्ध में कुछ अतिरिक्त शक्ति झोंकनी पड़ेगी.लेकिन अगर सूचनाऐं सही निकली तो हर मोर्चे पर कम शक्ति में हमारी फतह होगी.मुझे तुम्हारे दोस्त का नम्बर दो मैं खुद उसको समझाता हूं ताकि वह इस नाटक का हिस्सा बनने को तैयार हो जाय .’अफसर ने अनुरोध किया.


लोग देश के लिये अपनी जान तक कुर्बान कर देते है तो क्या हम सिविलियन अपने देश की खातिर एक छोटी सी कुर्बानी नहीं दे सकते.अगर सयाली को मंजूर हो तो यह नाटक नहीं सही की शादी होगी.मुझे अपने देश के काम आने में खुशी ही होगी.यह मेरा अपना सौभाग्य होगा.’सौजन्य ने सैन्य अधिकारी के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए कहा.


सयाली के पास सोचने के लिये ज्यादा समय नहीं था अतः उसने परिस्थितियों को देखते हुए तुरंत हां करदी.
शादी के बाद अशफ़ाक़ के द्वारा दी गई सारी सूचनाऐं सही निकली और भारतीय सेना को विराट विजय मिली.
तीनों दोस्तों की देशभक्ति लाजवाब और बेजोड़ रही.’युद्ध के बाद एक सम्मान समारोह में सर्वोच्च सेना अधिकारी कह रहे थे.

Story by Harish Jaiswal

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