क्या बच्चों को भी कोरोना हो सकता है?

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क्या बच्चों को भी कोरोना हो सकता है?
क्या बच्चों को भी कोरोना हो सकता है?

देखा जा रहा है कि बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे है लेकिन जितना असर बड़ों के अंदर हो रहा है

उतना ही  असर  बच्चों में पाया जा रहा है या नहीं इसकी अभी तक कोई पुष्टि नहीं हो पाई है

लेकिन फिर भी हमें कोरोना के समय बच्चों की एक्टिविटी को ज्यादा से ज्यादा ध्यान  देने की आवश्यकता है

जब तक वेक्सिनेशन का समाधान ना निकल सकें

बच्चों में कोरोना का डर

हालांकि कुछ क्षेत्रों में बच्चों में इस महामारी की संख्या कम देखने को मिली है

डॉक्टर्स के अनुसार बच्चों में बड़ों की अपेक्षा  इम्युनिटी अच्छा पाया जाता है।

लेकिन इस तीसरी लहर के आने का भय सभी के मन मे है हालांकि डॉक्टरों ने बच्चों की सुरक्षा के उपाय निकाल लिए है।

यह कहा जा रहा है कि इस वायरस की चपेट में कम ही बच्चे नजर आए है ।

बच्चों के माता पिता के लिए अब चिंता का विषय बनता जा रहा है

लेकिन अब खुशी की बात यह भी है कि बच्चों की वेक्सिनेशन को ध्यान में रखते

2 साल से लेकर 18 साल तक के  नीचे उम्र के बच्चों में वेक्सिनेशन की तैयारी शुरु कर दी गई है।

फिलहाल जब तक वैक्सीनेशन ना आ पाएं तब तक बच्चों को सावधानी से रखा जाए।

यदि बच्चों में कुछ ऐसे संकेत पाय जाए तो क्या होंगे वो लक्षण आइये जाने –

बच्चों में कोरोना के लक्षण

आमतौर पर बच्चों के कुछ ऐसे लक्षण जैसे कि बुखार या सर्दी जिसे हम वायरल

या सामान्य बुखार समझ कर डॉक्टर की सलाह नही लेते है और बिना दिखाए दवाई दे देंते।

लेकिन इस पर ध्यान देना ज़रूरी है कि कहीं बच्चों में संक्रमित होने के कुछ लक्षण तो नही है

आइये जाने और बिना देरी किए इस बात को पहचाने। डॉक्टर के अनुसार बताया जा रहा है

कि कोरोना के लक्षणों में खांसी, बुखार, ठंड लगना, सांस फूलना या सांस लेने में दिक्‍कत होना,

मांसपेशियों या बदन में दर्द होना, गले में खराश, स्‍वाद और गंध ना आना, दस्‍त, सिरदर्द, थकान, उल्‍टी या

मतली और नाक बहना शामिल है। यदि इनमें से कोई भी

आपके बच्चों में नजर आए तो तुरंत डॉक्टर को सलाह लेकर सही समय पर दवाई दें।

10 साल से कम उम्र में नेचरल इम्युनिटी पाई जाती है

जी हां बच्चों के अंदर Natural immunity होती है जिस वजह से भी बच्चों में इस संक्रमित का प्रभाव कम  से कम पाया जाता है  

क्योंकि उनके पहले से कुछ वेक्सिनेशन जिन्ह समय पर लगवाना ज्यादा महत्वपूर्ण है

बच्चों के इलाज के लिए विशेष प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है,

इसलिए सरकार ने अपने स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है।

तैयारियों में कुछ भी गलत नहीं बताया गया है तो ज्यादा खबराने की बात नहीं है, सावधानी रखना ज़रूरी रहेगा.

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