क्यों मनाई जाती है अम्बेडकर जयंती? पढ़ें पूरी खबर

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Dr, BR Ambedkar
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देश आज संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती मना रहा है.
डॉ अम्बेडकर की इस जयन्ती को देश में समानता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है.
दलितों के अधिकार और अछूतों के सम्मान में खड़े होने वाले बाबासाहेब ने महिलाओं के अधिकार की लड़ाई भी लड़ी.
डॉ. अम्बेडकर ने कहा था कि मैं किसी समाज की तरक्की को उस तरक्की से मापता हूँ जो उस समाज की महिलाओं ने हासिल की है.
देशभर में डॉ अम्बेडकर को बाबासाहेब,संविधान निर्माता, स्वतंत्रता सेनानी और न्यायविद जैसे नामों से जाना जाता है.
बाबासाहेब ने ही भारत में दलित बौद्ध आंदोलन को बल दिया था.
उन्होंने हमेशा एक ऐसे समाज के निर्माण पर जोर दिया जिसमें सभी को समान माना जाए.
उनसे जुड़ा एक महत्वपूर्ण तथ्य ये भी है की वे भारत के कानून और न्याय मंत्री भी थे.

बाबासाहब के अमर विचार

वे लोग कभी इतिहास नहीं बना सकते जो इतिहास को भूल जाते हैं ”

“एक महान व्यक्ति एक प्रतिष्ठित व्यक्ति से इसलिए अलग है क्योकि वह समाज का नौकर बनने के लिए तैयार है”

“जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता प्राप्त नहीं करते हैं, तब तक कानून द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वतंत्रता से आपको कोई फायदा नहीं होगा”

“राजनीतिक अत्याचार सामाजिक अत्याचार की तुलना में कुछ भी नहीं है और समाज को धता बताने वाले सुधारक सरकार को धता बताने वाले राजनेता से अधिक साहसी व्यक्ति हैं:

“मन की खेती मानव अस्तित्व का अंतिम उद्देश्य होना चाहिए”

“पति और पत्नी के बीच का रिश्ता सबसे करीबी दोस्तों में से एक होना चाहिए”

“पुरुष नश्वर हैं। इसलिए विचार हैं। एक विचार को प्रसार की जरूरत है क्योंकि एक पौधे को पानी की आवश्यकता होती है अन्यथा दोनों मर जाएंगे और मर जाएंगे।”

“जीवन लंबे समय के बजाय महान होना चाहिए”

“मुझे वह धर्म पसंद है जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है”

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