राम मंदिर विवाद सुलह कराने अयोध्या पहुंचे श्री श्री

"राम मंदिर विवाद"

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राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद में मध्यस्थता की कोशिश करने के लिए श्रीश्री रविशंकर गुरुवार को अयोध्या पहुंच गए।

  (अयोध्या)

राम मंदिर विवाद: सुलह कराने अयोध्या पहुंचे श्री श्री, संतों में घमासान
। राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद में मध्यस्थता की कोशिश करने के लिए श्रीश्री रविशंकर गुरुवार को अयोध्या पहुंच गए। उनकी इस कोशिश के बीच संत समाज में घमासान मचा हुआ है। निर्मोही अखाड़े ने जहां विश्व हिंदू परिषद पर राम मंदिर के नाम पर घोटाला करने का आरोप लगाया है, वहीं राम मंदिर आंदोलन से प्रमुखता से जुड़े रहे राम विलास वेदांती ने श्रीश्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। निर्मोही अखाड़े के सदस्य सीताराम ने आरोप लगाया कि वीएचपी ने राम मंदिर के नाम पर 14 सौ करोड़ का घोटाला किया है। उन्होंने कहा, 14 सौ करोड़ खा गए वीएचपी के लोग, हम लोग राम जी के पुत्र हैं, सेवक हैं, हमें कभी भी पैसे की पेशकश नहीं हुई। पैसे खाकर तो नेता लोग बैठे हैं। सीताराम ने कहा कि वीएचपी ने घर-घर घूम कर एक-एक ईंट मांगी, पैसा जमा किया और फिर पैसे को खा गए। उन्होंने कहा कि जितने फर्जी न्यास बने हैं, वे मुसलमानों को मजबूत करना चाहते हैं। रामलला यानी निर्मोही अखाड़ा और निर्मोही अखाड़ा यानी रामलला। उधर, वीएचपी ने इस आरोप को निराधार बताया है। प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि राम मंदिर के लिए वीएचपी ने कभी किसी से एक पैसा नहीं लिया। 1964 में वीएचपी आस्तित्व में आई था और हर साल इसका ऑडिट होता है। हमारे पास एक-एक पैसे का हिसाब है। राम विलास वेदांती तो श्रीश्री की मंशा पर बुधवार को ही सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था, श्रीश्री को अपना एनजीओ चलाना चाहिए और विदेशी चंदे को जमा करना चाहिए। श्रीश्री ने काफी धन इकट्ठा कर रखा है और उसकी जांच से बचने के लिए वह राम मंदिर के मुद्दे में कूद पड़े हैं। गुरुवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बदले-बदले से नजर आए। उन्होंने कहा कि अब बातचीत में देर हो चुकी है। श्रीश्री से मुलाकात के दौरान राम मंदिर के मसले पर विस्तार से कोई बातचीत नहीं हुई। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पांच दिसंबर से अयोध्या मसले पर हर दिन सुनवाई होनी है। श्रीश्री इस विवाद का कोर्ट के बाहर समाधान कराना चाहते हैं। 30 अक्टूबर-2008 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित भूमि को तीन हिस्सों में विभाजित करते हुए दो हिस्सों को राम मंदिर के पैरोकारों और एक हिस्सा बाबरी मस्जिद के पैरोकारों को सौंपने का आदेश किया था।

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