होलिका दहन क्यों मानते हैं? सिर्फ 3 कारणों से नकारत्मक ऊर्जा को दूर करें.

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होलिका दहन
होलिका दहन क्यों मानते हैं? सिर्फ 3 कारणों से नकारत्मक ऊर्जा को दूर करें.
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होली का त्यौहार रंगों का त्यौहार माना गया है

इस दिन रूठे लोग भी आपस मे रंग लगा कर बुराई का नाश करते है।

रंगों की होली के एक दिन पहले होली का दहन मनाया जाता है

जहां आसपास की बुरी नजरों को उस दहन में जलाया जाता है।

और घर से  नकारात्मक ऊर्जा को दूर किया जाता है।

आइये जाने होली का दहन में किस तरह घर की नकारात्मक शक्ति को किस तरह करें नाश।

इसके पहले यह जानना है आवश्यक कि क्यों मनाई जाती है होली दहन।

होलीका दहन के पीछे छिपी कहानी-

होली का दहन की कथा

हिन्दू पंचाग के अनुसार, फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की तिथि में होली मनाई जाती है।

होली के एक दिन पहले होली का दहन मनाया जाता  है

जो कि बुराई में अच्छाई की विजय होने पर इस पावन पर्व के त्यौहार

को बड़ी धूम धाम में मनाया जाता है साल  2021  के अनुसार होली

दहन 28 मार्च को औऱ रंगों की होली 29 मार्च को मनाई जाएगी।

इस पावन त्यौहार की कहानी को बताया जाएगा।

आइये जाने इसके पीछे की कहानी –

होलिका दहन की कहानी उस नन्हे बालक प्रह्लाद के ऊपर बताई गई है

जहां वह विष्णु भगवान के बहुत बड़े भक्त थे।

तो आइए विस्तार पूर्वक जाने। हिरण्यकश्यप ब्रह्मा जी के बहुत बड़े भक्त थे

एक दिन हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी की इतनी तपस्या करने के बाद हिरण्यकश्यप ने मांगा वरदान

उस वरदान में यह मांगा कि कोई भी जीव जंतु, पशु- पक्षी, देवी – देवता

या कोई भी मनुष्य नहीं मार सकता है और  किसी  भी समय मे चाहे दिन हो,

रात हो या बहार हो या घर कहीँ  नहीं मार सकता है

ऐसा वरदान मांगकर हिरणकश्यप खुद को भगवान मानने लगता है

और साथ ही सभी लोगों से खुद की पूजा भी करवाता है

लेकिन उनके पुत्र प्रह्लाद विष्णु भगवान के भक्त थे और

यह बात हिरणकश्यप को रास नही आती थी क्योंकि वह विष्णु भगवान को पसंद नहीं करते थे और

प्रह्लाद को कई बार समझाने पर भी प्रह्लाद विष्णु भगवान की भक्ति और

उपासना देख कर प्रह्लाद को कई बार अलग अलग तरह से मारने की कोशिश की लेकिन

हर बार प्रह्लाद बच जाते थे फिर एक दिन हिरणकश्यप के आदेश अनुसार

बहन होलिका को प्रह्लाद को मारने की साजिश की

जिंसमे होलिका को अग्नि में बैठना था दरसअल होलिका ने तप करके

अग्नि देवता से कभी ना जलने के वरदान लिया था जिस वजह से 

अपनी गोद मे बैठाकर अग्नि में बैठ गई।

इन सब के वाबजूद प्रह्लाद की भक्ति नहीं रुकी और विष्णु भगवान का नाम जप करते रहे।

लेकिन होलिका  के इस घमंड ने उन्हें जला कर राख कर दिया गया। 

प्रह्लाद विष्णु जी की निःस्वार्थ तपस्या ने उन्हें बचा लिया।

तब से होली का दहन में बुराई पर अच्छाई को जीत मनाई जाती है।

कैसे घर से दूर करें नकारात्मक ऊर्जा –

अगर घर मे कोई कलह हो या बार बार क्लेश होते हो या

फिर घर के सदस्य को कोई पीड़ा या फिर घर मे कोई नकारात्मक शक्ति को करें दूर तो इन उपाय को अपनाएं।

लेकिन होली जलने से पहले इन उपाय को करना है

1)नहाने से के बाद घर के हर कोने में नींबू को रख दें। लेकिन किचन में सिर्फ

एक ही नींबू रखें ध्यान रखें किचन में दक्षिण-पूर्व दिशा की तरफ में ही रखना होगा।

और बाकी कमरों में घर के हर कोने के हिसाब से नींबू लें लें।

शाम को होलिका दहन के पहले किसी भी पैकेट में इन नींबू को उठा कर रखना है।

2) इसके अलावा घर मे जितने भी सदस्य है उस हिसाब से आटा लेवें और

उसमें लाल मिर्च, नमक मिला कर तीनों को एक साथ मिक्स करलें।

फिर जितने भी सदस्य है उसमे एक एक सदस्य के  ऊपर से

एंटीक क्लॉक वाइस की तरह 7 बार घुमाया फिर किसी पैकेट में डाल दें।

नींबू का और आटे का पैकेट अलग रखें।

3)होलिका दहन में जब अग्नि प्रज्वलित हो रही हो, तब होली के चारों ओर 7 बार चक्कर लगा कर

अग्नि के चारों ओर आटे में मिक्स सामग्री को और नींबु को आग में डाल दें और हो सकें

तो कागज में लपेटकर ले जाए जिससे आग में यह साम्रगी सहेत डाल दे सकते है

लेकिन इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि पॉलीथिन को आग में नहीं फेकना है

होलिका दहन में आपके घर की सारी नकारात्मक दूर हो जाएगी जितने भी क्लेश है

वो सब मिट जाएंगे। इस तरह उपाय करने से बिगड़े काम दूर हो जाएंगे।

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