2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला: न्यायालय के फैसले को कांग्रेस अपनी बेगुनाही का सर्टिफिकेट न समझे: चौहान

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भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, सांसद नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि न्यायालय के फैसले से कांग्रेस पार्टी खुश जरूर हुई है, जबकि हकीकत यह है कि पूरे प्रकरण में घोर अनियमितताएं बरती गईं। कांग्रेस न्यायालय के इस फैसले को अपनी बेगुनाही का सर्टिफिकेट समझने की भूल न करें। उन्होंने कहा कि 2-जी लायसेंस आवंटन के लिए यूपीए सरकार का तरीका भ्रष्ट और बेईमानी वाला था, जिसे 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने बरती गई अनियमितता के आधार पर ही खत्म किया था।उन्होंने कहा कि बिना निलामी के स्पेक्ट्रम कुछ लोगों को दिया गया। पहले आओ पहले पाओं की पॉलिसी को बदलकर पहले पैसे दो, पहले पाओ यह पूरी तरह भ्रष्ट नीति थी, जिसमें यूपीए सरकार ने भ्रष्टाचार का खेल खेला। 2007 और 2008 में स्पेक्ट्रम आवंटन का आधार उस वक्त की बाजार कीमतों के आधार पर न होकर 2001 की कीमतों के आधार पर लायसेंस आवंटित किये गये जो स्पष्ट तौर पर भ्रष्टाचार उजागर करते हैं।नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि बैंक ड्राफ्ट को एडवांस तारीख में ही तैयार किया गया था। कट आॅफ डेट एडवांस में ही तय हो गया था, इससे यह स्पष्ट होता है कि लायसेंस आवंटन में निजी हितों को महत्व दिया गया। बाद में एनडीए सरकार ने स्पेक्ट्रम को निलाम किया, जिसमें पहले 1734 करोड़ मिले थे, 2015 में 1 लाख 10 हजार करोड़ और 2016 में 65 हजार करोड़ रू. मिले। जांच एजेंसियां न्यायालय के फैसले को देख रही हैं और आगे की न्यायालयीन कार्यवाही करेगी इसलिए कांग्रेस और यूपीए को इस फैसले से अपनी ईमानदारी के सबूत के रूप में पेश नहीं करना चाहिए।

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