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20 हजार से शुरू हुई ये कम्पनी, आज है 18 करोड़ का रेवेन्यू

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Prakritii Cultivating Green

18 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार वाली प्रकृति आज सीधे

120 व अप्रत्यक्ष रूप से 700 लोगों को रोजगार दे रही है

लेकिन शुरुआत में इनके पास मात्र दो लोग थे और निवेश था मात्र 20 हजार रुपये का.

जी हाँ ये कहानी है गुरुग्राम के ग्रेजुएट ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट से ग्रेजुएशन करने वाले

अमरदीप बर्धन और वैभव जायसवाल की.
एक सामान्य लेकिन उत्कृष्ट बिजनेस आइडिया को लेकर दोनों साथ आये.
दोनों ने ये महसूस किया की प्लास्टिक और पॉलीमर प्लेटों के

इस्तेमाल से होने पर्यावरण को काफी नुकसान पहुँच रहा है.
इसके हलस्वरूप दोनों ने एरेका लीफ प्लेट यानी एरेका की पत्तियों से प्लेट बनाने की बात सोची.

सबसे पहले दोनों ने अमरदीप के राज्य असम से पत्तियां लेने के बारे में सोचा जो काम कर गया.
वास्तव में असम में पर्यावरण के अनुकूल और डिस्पोजेबल प्लेट बनाने के लिए

बड़ी मात्रा में एरेका पत्तियां मिल जाती हैं.
शुरुआत में कुछ आवश्यक कदम उठाने के बाद आखिरकार दोनों ने 2012 में प्रकृति कल्टिवेटिंग ग्रीन की शुरुआत की.

अमरदीप के अनुसार शुरुआत में इस कम्पनी के लिए मात्र बीस हजार रुपये का निवेश किया गया था.
चुनौतियाँ बहुत ज्यादा थी जिनका सामना करते हुए हमने तमिलनाडु में एक मैनुफेक्चरिंग यूनिट की शुरुआत की.
हमने असम से लायी गयी पत्तियों का यूज करके अलग अलग शेप और साइज की प्लेटें बनाना शुरू किया.

शुरू में हमने ये प्लेटें कैटरर्स और इवेंट आयोजकों को बेचीं.

धीरे-धीरे लोकप्रियता बढ़ने लगी जिसके बाद हमने और भी प्रोडक्ट बनाने शुरू किये.
अभी हम पूरी इको फ्रेंडली कटलरी के साथ गिलास भी बना रहे हैं.
अगर आर्थिक पक्ष की बात करें तो हमारी कम्पनी आज 18 करोड़ सालाना कमा रही है.

आपको बता दें कि वर्तमान में हमारे देश में प्लास्टिक के डिस्पोजेबल का उपयोग बहुतायत में होता है.
इन बर्तनों को सड़ने-गलने में हजारों साल लगते हैं
और इस प्रक्रिया में वे मिटटी, पानी और भूमि को नुक्सान पहुंचाते हैं.
लेकिन एरेका पत्तियों से जो प्लेटें बनती हैं वे आसानी से बायोडीग्रेड हो जाती हैं.

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