ग्रह पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव : खतरे की घण्टी

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Effects of climate change
Effects of climate change on our planet

हमारे ग्रह पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

दोस्तो वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है।

सरकारें जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को गंभीरता से ले रही हैं। effects of global warming

ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि कॉर्बनडाई ऑक्साइड के उत्सर्जन

को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रमोट किया जा रहा है।

वहीं भारत में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ाने के लिए सरकार तरह-तरह के प्रयास कर रही है।

इसी कड़ी में नई दिल्ली में देश का पहला इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन भी खोला गया है।

आखिर यह जलवायु परिवर्तन है क्या, जिसके कारण पूरा विश्व इतना चिंतित है।

जलवायु परिवर्तन क्या है ?

अगर हम 10 साल पहले के और वर्तमान समय की जलवायु पर गौर करें तो हमें फ़र्क़ साफ नजर आता है।

जिस हिसाब से तापमान बढ़ रहा है, देश के कई हिस्सों में हीट वेव का सामना करना पड़ रहा है,

यह सब जलवायु परिवर्तन के कारण ही हो रहा है।

अगर हम जलवायु की बात करें, तो किसी स्थान में यदि एक तरह का औसत मौसम लंबे समय तक बना रहता है

तो उसे उस स्थान विशेष की जलवायु कहते हैं। जलवायु और मौसम दोनों एक दूसरे से अलग होते हैं।

जैसे सुबह बारिश हुई दोपहर में धूप निकल आयी, इसे मौसम बदलना कहते हैं,

या अभी गर्मी का मौसम है दो महीने बाद बरसात का मौसम आ जायेगा।

वहीं जलवायु इतनी जल्दी नहीं बदलती। अगर भारत की जलवायु की बात करें तो भारत की जलवायु उष्ण कटिबंधीय मानसूनी जलवायु है।
अब सवाल यह उठता है कि यदि जलवायु इतनी जल्दी नहीं बदलती तो यह जलवायु परिवर्तन क्यों हो रहा है?

जलवायु परिवर्तन के कारण –

जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक तथा मानवीय दोनों हैं।

अगर प्राकृतिक कारणों की बात करें तो ज्वालामुखी विस्फोट, धरती का घूमना, महाद्वीपों का खिसकना आदि कारण प्राकृतिक हैं।

वहीं अगर मानवीय कारणों की बात करें तो ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन जलवायु परिवर्तन का महत्वपूर्ण कारण है।

ग्रीन हाउस गैसें जैसे कॉर्बनडाई ऑक्साइड, मीथेन, सल्फ़र डाई ऑक्साइड आदि के उत्सर्जन में वृद्धि पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि करता है।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव –

जलवायु परिवर्तन का सीधा असर प्राणियों पर पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण अनेक प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं।

भूकम्प की आवृत्ति बढ़ गयी है। लोगों को सूखे का सामना करना पड़ रहा है।

वैज्ञानिकों का कहना है यदि वर्ष 2100 तक ग्लोबल वार्मिंग को 1.5℃ तक नहीं रखा गया तो पूरे विश्व को इसके भयानक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

हीट वेव, प्रजातियों के विलुप्त होना, समुद्री जल का बढ़ना जिनमें से प्रमुख है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि पर भी पड़ रहा है।

हम सभी को पता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

भारत में कृषि अधिकांशतः बरसात पर निर्भर करती है।

मगर जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के आने और वर्षा वितरण में अनिश्चितता रहती है।

वहीं जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों को सूखे का सामना भी करना पड़ रहा है।
जंगलों में आग लगने की घटनाएँ भी बढ़ती जा रही हैं।

अभी पिछले 3 दिनों से उत्तराखंड के जंगलों में आग दहक रही है।

इस भीषण आग पर काबू पाने में वन विभाग नाकाम है।

वहीं पूरी दुनिया की ऑक्सीजन का बीसवां भाग अकेले अमेजन के जंगलों से मिलता है।

अमेजन के जंगल भी भीषण आग का सामना कर चुके हैं।

यह सब जलवायु परिवर्तन के कारण ही हो रहा है।

जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किये जा रहे प्रयास –

पूरे विश्व में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए ग्रीन हाउस उत्सर्जन को कम करने के लिए वर्ष 2015 में पेरिस समझौता हुआ था।

इस समझौते पर विश्व के सभी देशों ने हस्ताक्षर किए हैं।

इस समझौते के तहत कार्बन उत्सर्जन की कटौती के लक्ष्य भी निर्धारित किये गए।

पेरिस समझौते के तहत EV30@30 अभियान भी चलाया गया।

इस अभियान का लक्ष्य वर्ष 2030 तक कुल वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की भागीदारी 30% सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत में भी सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग के लिए लोगों को जागरूक कर रही है।

इसी कड़ी में बैटरी स्वैपिंग नीति के बारे में भी विचार किया जा रहा है।

नीति आयोग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।