बच्चों के ऊपर आधारित है फिल्म ‘फन्ने खां’ , देती है यह ख़ास मैसेज

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फन्ने खां - Film Review
बड़े परदे पर प्रदर्शित हुई फिल्म 'फन्ने खां'

Film Review – अनिल कपूर की फिल्म ‘फन्ने खां’ बड़े परदे पर प्रदर्शित हो चुकी है | यह फिल्म साल 2000 में रिलीज़ हुई बेल्जियन के एक डायरेक्टर डोमिनिक डेरडेर द्वारा बनाई गई एवरीवडी फेमस की रीमेक है |

फन्ने खां‘ का निर्देशन राकेश ओमप्रकाश महरा ने किया है | यह फिल्म पिता और बेटी के रिश्ते पर आधारित है | फिल्म में अनिल कपूर फन्ने खां यानी प्रशांत शर्मा का किरदार निभा रहे हैं | वो ओवरवेट बेटी पिहू संद का पिता है | जिसका मानना रहता है कि उसकी बेटी में सिंगिग का टैलेंट खूब भरा हुआ है। इस बात से दूसरा कोई सहमति नहीं रखता है | फिल्म में फन्ने खुद भी एक सिंगर रहता है और अपने आदर्श मो. रफी साहब जैसा बनना चाहता है लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वो अपनी बेटी के द्वारा अपना सपना पूरा करने में जुट जाता है। यहां तक कि बेटी का नाम भी वो लता मंगेशकर से प्रेरित होकर लता ही रख देता है।

फिल्म की कहानी काफी इंटरेस्टिंग है | अनिल कपूर ने फिल्म में शानदार एक्टिंग की है। फिल्म में फन्ने खां का केवल एक ही उद्देश्य होता है कि उसकी बेटी लता की आवाज लाखों लोगों तक पहुंचे।

वो विपरीत परिस्थितियों से घबराने की बजाए अपने बल बूते साहस पर लड़ना जारी रखता है। अनिल कपूर फन्ने खां के किरदार में पूरी तरह जचे हैं । इनके अलावा राजकुमार राव का किरदार भी काफी अच्छा है। वहीं, यंग टैलेंट पिहू अपनी पहली फिल्म में चार्म, एक्टिंग और खूबसूरती से दिल जीत लेती है। ऐश्वर्या राय बच्चन फिल्म में इंडियन मेडोना लग रहीं हैं। कहा जा सकता है कि निर्देशक अतुल मांजरेकर फन्ने खां की लोअर मिडिल क्लास लाइफ पर्दे पर दिखाने में काफी हद तक सफल साबित हुए हैं | यह फिल्म कुल मिलाकर 2 घंटे 9 मिनट की है | फिल्म की कहानी बच्चों को मैसेज देती है कि जिंदगी में जो करना चाहते हैं वो द्रणता और उद्देश्य से करें |

 

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