एडवेंचर के साथ कॉमेडी-ड्रामा से भरपूर है फिल्म ‘कारवां’

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कारवां - Film Review
बड़े परदे पर प्रदर्शित हुई इरफ़ान खान की फिल्म 'कारवां'

Film Review – इरफ़ान खान की फिल्म ‘कारवां’ सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो चुकी है | इस फिल्म में एडवेंचर के साथ कॉमेडी और ड्रामा भी देखने को मिला |

यह फिल्म काफी डीप है। इस फिल्म में अविनाश का किरदार निभा रहे एक्टर दुलकर सलमान एक मायूस जिंदगी जीते हुए नजर आ रहे हैं और बैंगलोर की एक आईटी कंपनी में बोरिंग की नौकरी करते हैं । फिल्म के फ्लैशबैक में इस बात का खुलासा किया जाता है कि उसका दिल फोटोग्राफी में रहता है लेकिन उसके पिता आकाश खुराना फोटोग्राफी के करियर को बिलकुल सपोर्ट नहीं करते हैं । इस फिल्म में मोड़ तब आता है जब अविनाश को पिता के निधन की खबर मिलती है। जो कि तीर्थ यात्रा के दौरान हुआ है।

अविनाश अपने दोस्त इरफ़ान खान जो कि शौकत के किरदार में दिख रहे हैं उसकी मदद लेता है अपने पिताजी का मृत शरीर वापस लाने के लिए, उसके बाद उसे पता चलता है कि उसके पिता की बॉडी दूसरे मृत शरीर से एक्सचेंज हो गई है जो कि तान्या का किरदार निभा रहीं एक्ट्रेस मिथिला पालकर की दादी की होती है। इसी दौरान फिल्म में एडवेंचर है, कॉमेडी है, ड्रामा है |

इस फिल्म का निर्देशन आकर्ष खुराना ने किया है |

कुल मिलकर इस फिल्म को फिल्म मेकर्स ने बड़ी चालाकी से मौत को थीम बनाकर दर्शकों को बताया है कि जब हम अपने आपको मुक्त कर देते हैं तो जिंदगी में कुछ अच्छी बातों के लिए जगह बनाते हैं। यह फिल्म 1 घंटे 54 मिनट की है |

 

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