Mulayam Singh Yadav Birth Anniversary: अखिलेश यादव ने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा डिंपल की रिकार्ड जीत ही होगी

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Mulayam Singh Yadav Birth Anniversary: अखिलेश यादव ने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा डिंपल की रिकार्ड जीत ही होगी
Mulayam Singh Yadav Birth Anniversary: अखिलेश यादव ने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा डिंपल की रिकार्ड जीत ही होगी

समाजवादी पार्टी के दिवंगत सुप्रीमो और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव की जयंती आज 22 नवंबर को है। तीन बार के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राजनीतिक क्षेत्र पर एक अमिट छाप छोड़ी। जमीनी स्तर के राजनेता और ओबीसी नेता के रूप में उनका कद बेजोड़ है। 1960 और 1970 के दशक में राम मनोहर लोहिया की समाजवादी राजनीति से प्रभावित होकर यादव ने समाज के दलित वर्गों के लिए लगातार काम किया। उनके समर्थक उन्हें प्यार से ‘नेताजी’ कहकर बुलाते थे। मुलायम सिंह यादव ने लंबी बीमारी के बाद इसी साल 10 अक्टूबर को अंतिम सांस ली। उनके निधन पर पार्टी लाइनों के राजनेताओं ने शोक व्यक्त किया।

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा कि मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र निश्चित रूप से रिकार्ड मतों से पार्टी प्रत्याशी डिंपल यादव को विजयी बना कर पार्टी संस्थापक सिंह यादव (नेताजी) को अपनी सच्ची श्रद्धांजलि Mulayam Singh Yadav Birth Anniversary देगा। उन्होंने कहा कि नेताजी की कर्म स्थली जसवंतनगर हर चुनाव में समाजवादियों को जिताने का नया रिकॉर्ड बनाने में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ती रही है, इसलिए पूरे प्रदेश और देश में इस विधानसभा का नाम ‘रिकॉर्ड तोड़-जसवंतनगर’ के नाम से प्रसिद्ध है।

श्री यादव ने कार्यकर्ताओं से खचाखच भरे सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि वह स्वयं कभी जसवंतनगर वोट मांगने नहीं आए और न ही कभी यहां प्रचार किया, क्योंकि यहां के लोग अपने दिल से नेताजी और शिवपाल सिंह से जुड़े थे। जब भी कोई लोकसभा या विधानसभा चुनाव हुआ, यहां के लोगों ने समाजवादी पार्टी को जितने का काम किया है। जसवंतनगर के वोट खोलते ही विपक्षी उम्मीदवारों के पसीने छूट जाते थे।

उन्होंने कहा ”भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) झूठ और नफरत भरी बातों के अलावा कभी जनता के बारे में नहीं सोचती है। हम पर सदैव परिवारवाद का आरोप लगाती रही है। जब हम और चाचा अलग थे, तो ये पार्टी द्वारा द्वारा कहा जाता था कि अपना परिवार संभाल नहीं पाते ,देश या प्रदेश क्या संभालेंगे। अब जबकि हम एक हैं तो इस पार्टी के लोग हम पर परिवारवाद का आरोप लगाने में जुट गए।

समाजवादी पार्टी के दिवंगत संस्थापक और नेताजी (Netaji) के नाम से मशहूर हुए मुलायम सिंह यादव की आज जयंती है| 83 साल की उम्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का पिछले महीने (10 अक्टूबर) ही निधन हुआ था. नेताजी के दुनिया को अलविदा कहने से खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट (Mainpuri Lok Sabha Constituency) पर पांच दिसंबर को उपचुनाव (Mainpuri By-Election) होना है| 1996 से यह सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है| मुलायम यहां से पांच बार (1996, 2004, 2009, 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव में) सांसद चुने गए थे| 

इस सीट पर बादशाहत कायम रखने के लिए समाजवादी पार्टी एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है. सीट कहीं खिसके नहीं, इसके लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी डिंपल यादव को ही उम्मीदवार बनाया है| मुलायम सिंह की बहू के तौर पर डिंपल को मतदाताओं की सहानुभूति वोटों के रूप में मिल सकती है लेकिन यह महज उपचुनाव नहीं, नेताजी की तुलना में खुद साबित करने के लिए अखिलेश यादव की अग्निपरीक्षा भी है| मुलायम सिंह यादव की जयंती पर आइये जानते हैं कि अखिलेश अपने पिता के मुकाबले अभी कहां खड़े हैं|

गठबंधन की राजनीति में नेताजी के मुकाबले अखिलेश कहां?

जिंदगी में दोस्त और राजनीति में गठबंधन के एक ही मायने हैं| जितने ज्यादा सहयोगी, उतना बड़ा गठबंधन और सत्ता में टिके रहने की उतनी ज्यादा पावर. किसी पार्टी की राजनीति का स्वास्थ्य उसके गठबंधन की सेहत से मापा जा सकता है, मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन की राजनीति से कभी परहेज नहीं किया और जरूरत पड़ी तो अपने विरोधियों से भी हाथ मिला लिया, इससे उन्हें ज्यादा समय तक पार्टी को पोषण देने और सत्ता में बने रहने का अवसर मिला|