सच्चे हैं हम, दगाबाज़ नहीं हैं दोस्तों मुसलमान हैं, गद्दार नहीं हैं।

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sachche hain ham
सच्चे हैं हम, दगाबाज़ नहीं हैं दोस्तों मुसलमान हैं, गद्दार नहीं हैं।

सच्चे हैं हम, दगाबाज़ नहीं हैं.दोस्तों मुसलमान हैं, गद्दार नहीं हैं।
करती है सितम दुनिया तो हस के सह लेंगे ,


यह सब्र की हिक़मत है हम लाचार नहीं हैं।i
खून बेगुनाहो का न बहाया हैं, न बहाएंगे.


मोमिन हैं, इंसानियत के कस्सार नहीं हैं।
जान हाज़िर है हिफाज़त ए वतन मे हमारी,


आशिक़ ए वतन हैं कोई मक्कार नहीं हैं ।
उठा ली तलवार तो दुनिया को दिखा देंगे,


सब्रमंद हैं, हालात ए वतन से बेज़ार नहीं हैं।
“फ़ाज़िल ” ज़रा देख लो इतिहास उठा कर,
हम सुल्तान ए सल्तनत हैं कोई गद्दार नहीं हैं।

Written By AFTAB ANSARI

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