सरकार का ,घर खरीदारों को बड़ा तोहफा, किफायती और निर्माणाधीन घरों पर घटी जीएसटी

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जीएसटी
यह फैसला रियल्टी सेक्टर को बूम देने वाला साबित होगा

यह फैसला रियल्टी सेक्टर को बूम देने वाला साबित होगा

नई दिल्ली -मोदी सरकार ने चुनावी रण में जाने से पूर्व देशभर में घर खरीदने का सपना दे रहे करोड़ों लोगों को बड़ा तोहफा दे दिया है। दरअसल रविवार को जीएसटी काउंसिल ने अपने घर का सपना देख रहे लोगों को बड़ा तोहफा दिया है। घरों पर लगने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) में बड़ी कटौती की गई है।निर्माणाधीन परियोजनाओं में मकानों पर जीएसटी की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 फीसदी किया गया है तो किफायती मकानों (अफ़ोर्डबल हाउजिंग) पर जीएसटी की दर को 8 प्रतिशत से घटाकर महज 1 फीसदी कर दिया गया है।

जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इसकी घोषणा की।

वित्तमंत्री ने कहा,हम रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ा बूम देना चाहते हैं। अफोर्डेबल हाउजिंग की परिभाषा को बदला गया है। ताकि अधिक से अधिक लोग इसका फायदा उठा सकें।वित्तमंत्री ने कहा, हम रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ा बूम देना चाहते हैं। अफोर्डेबल हाउजिंग की परिभाषा को बदला गया है। ताकि अधिक से अधिक लोग इसका फायदा उठा सकें। यह फैसला निश्चत तौर पर कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन देगा।

जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद वित्तमंत्री ने कहा कि बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली एनसीआर (दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव, फरीदाबाद),हैदराबाद,कोलकाता और मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में 60 वर्ग मीटर तक के मकान किफायती माने जाएंगे,जबकि नॉन मेट्रो शहरों में 90 वर्ग मीटर तक के घर अफोर्डेबल माने जाएंगे, जिनकी अधिकतम कीमत 45 लाख रुपये होगी।

नई दरें 1 अप्रैल 2019 से लागू होंगी। इस समय निर्माणाधीन प्रॉपर्टीज या रेडी टु मूव फ्लैट्स, जिन्हें कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला हो, पर 12 फीसदी जीएसटी लगता है।

हालांकि, बिक्री के समय कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल कर चुके प्रॉपर्टीज पर जीएसटी नहीं लगता है। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में 20 फरवरी को जीएसटी काउंसिल की 33वीं बैठक विडियो कांफ्रेंस के जरिए हुई, लेकिन उस दिन रीयल एस्टेट को लेकर फैसला नहीं हो सका था। बैठक रविवार तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।

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