मुश्किलों भरा सफर मान्य सिंह के संघर्ष का सफर,आइये जाने

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Maanyaa singh
मुश्किलों भरा सफर मान्य सिंह के संघर्ष का सफर,आइये जाने

एक छोटे से शहर में रहने वाली मान्या सिंह ने ना मुमकिन को मुमकिन में बदल दिया है

कई लड़कियों के जेहन में उनके सपनों को पंख भरने की हिम्मत दी है। मान्या सिंह उत्तर प्रदेश  में रहने वाली

जिनका जन्म कुशीनगर में हुआ है जिनके पिता ओमप्रकाश सिंह ऑटो ड्राइवर है

और उनकी माँ मनोरमा सिंह जो कि पार्लर में काम करती है। यूपी के देवोरिया में रहने वाली,

ऑटो ड्राइवर की बेटी मान्या ने रचा इतिहास

और बन गई मिस इंडिया रनर अप।

जो कुछ इस तरह अपने ख्वबो को किया पूरा और नाम कर दिया ऊंचा। 

Maanya singh struggle story

मान्या सिंह ने बचपन से ही

संघर्ष भरा जीवन जिया है जहां उनकी इस जीवन की दास्तां को सुनकर

उन लाखों लड़कियों को प्रेरणा मिल सकती है। मान्या सिंह के संघर्ष की बात करें

तो मान्या का सपना था कि वो लड़के और लड़कियों के बीच भेद भाव को दूर करना चाहती है

उन्हें यह हमेशा से ताने सुनने मिलते थे कि लड़की है,

तो उसको शादी करना या चुला चौका ही सम्भालना चाहिए,

घर से बाहर जाकर कोई काम नही करना चाहिए।

एक दिन मान्या के स्कूल में उसकी टीचर ने पूछा कि तुम क्या बनना चाहती हो तो

मान्या ने कह दिया पूरे जोश के साथ उसे मिस इंडिया बनना है

तभी क्लास के सभी बच्चे उस पर हसने लगे, मान्या ने ठान लिया कि

अब वो मिस इंडिया का खिताब जीत कर बताएगी।

तभी मान्या ने अपने घर आकर कहा उसे मिस इंडिया बनना है,

लेकिन उसके माता पिता ने उसका साथ दिया

उसके सपनो को पंख भरने की ताकत दी।

फिर क्या मान्या  महज़ 14 साल की उम्र में ही

अपने घर को छोड़कर मुंबई आ गई,

जिसे सपनो का शहर माना जाता है

मान्या सिंह भी अपने सपनों के साथ मुम्बई आ गई थी। 

मुंबई का रास्ता इतना आसान नही था

मान्या के संघर्ष का सफर अभी तो शुरू हुआ था

मुम्बई आ कर उसने जॉब की कॉल सेंटर में

फिर एडुकेशन भी पूरी की अपने ही पैसों से,

बहुत संघर्ष के बाद भी उसके रास्ते लगभग बंद ही थे

मॉडलिंग के लिए लोगों के ताने सुन सुन कर,

कई जगह हिम्मत भी खोई, टूटी भी, बिखरी भी,

खुद को फिर से समेट कर आगे भी बड़ी  लेकिन हार नही मानी।

और 19 साल की उम्र में ही मिस इंडिया का खिताब जीत गई।

मान्या सिंह का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे उनके माता पिता का हाथ है

जितनी तपस्या उनके माता पिता ने की है उतनी उन्हें नही की और यह क्राउन मेरे माता पिता के लिए है।

जिंसमे बताया कि ना मानो हार ना खो हिम्मत ठीक वैसे ही

मान्या ने अपने सपनो को पूरा करके दिखाया और साथ में यह भी बताया कि

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

तुम ठान लो अगर कुछ पाने की तुम्हें मंजिल खुदब खुद मिल जाती है.

मान्या उन सभी लड़कियों के लिए मिसाल है जिसने हालात से हार मान कर

अपनी हिम्मत को खो दिया और अपने सपनों को पीछे छोड़ दिया। 

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