ज्योतिरादित्य सिंधिया ने छोड़ा महासचिव पद

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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने छोड़ा महासचिव पद

कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया और पार्टी की मुंबई इकाई के अध्यक्ष मिलिंद एम. देवड़ा ने रविवार को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कुछ दिनों पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

इस बीच, शनिवार को कर्नाटक में सत्तासीन कांग्रेस-जनता दल (सेकुलर) गठबंधन के 11 विधायकों के इस्तीफे के बाद 13 महीने पुरानी राज्य सरकार संकट में आ गई है।

राहुल गांधी के पद छोड़ने के बाद से ही देश भर से पार्टी पदाधिकारियों के विरोध और इस्तीफे का दौर चल रहा है।

कांग्रेस ने 19 जून को ही राज्य इकाई के अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव और कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर खंडारे को छोड़कर कर्नाटक कांग्रेस कमेटी को भंग कर दिया था।

पार्टी ने उत्तर प्रदेश में सभी जिला कांग्रेस कमेटियों को भी भंग कर दिया और अनुशासनहीनता व पार्टी विरोधी गतिविधियों की शिकायतों को देखने के लिए जून में एक तीन सदस्यीय अनुशासन समिति का गठन किया।

लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी बनाए गए सिंधिया ने रविवार को ट्वीट किया, “लोगों के फैसले को स्वीकार करते हुए और जवाबदेही लेते हुए, मैंने राहुल गांधी को एआईसीसी (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) के महासचिव के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है।”

उन्होंने कहा, “इस जिम्मेदारी को सौंपने और अपनी पार्टी की सेवा करने का मौका देने के लिए मैं राहुल गांधी को धन्यवाद देता हूं।”

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से उन्हें 39 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि बाकी 41 सीटों की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी वाड्रा को दी गई थी।

हालांकि, पार्टी राज्य में संयुक्त प्रगतशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी की केवल एक सीट जीतने में सफल हुई।

पार्टी को बड़ी शर्मिदगी का सामना तब करना पड़ा, जब स्वयं राहुल गांधी अपने परिवार की पारंपरिक सीट अमेठी से चुनाव हार गए।

उन्हें केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता स्मृति ईरानी ने 55 हजार वोटों के अंतर से हराया।

इससे पहले एक आश्चर्यजनक कदम उठाते हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीने पहले मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद एम. देवड़ा ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने शहर इकाई की देखरेख के लिए तीन वरिष्ठ नेताओं के सामूहिक नेतृत्व की अस्थायी व्यवस्था की सिफारिश की है।

देवड़ा के कांग्रेस में राष्ट्रीय भूमिका के लिए नई दिल्ली जाने की संभावना है।

उनके एक सहयोगी के अनुसार, 26 जून को नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के निवर्तमान अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने के तुरंत बाद देवड़ा ने पद छोड़ने की इच्छा व्यक्त की थी।

देवड़ा के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है, “इस बात की जानकारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिवों मल्लिकार्जुन खड़गे और के.सी. वेणुगोपाल को भी दे दी गई है।”

देवड़ा को संजय निरूपम की जगह 2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मुंबई कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

उनके इस कदम को ‘निवर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष गांधी के इस्तीफे के साथ एकजुटता और सामूहिक जिम्मेदारी की अभिव्यक्ति’ के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, देवड़ा ने चार जुलाई को गांधी की मुंबई यात्रा का आयोजन किया।

उन्होंने कहा कि चुनाव की तैयारी के लिए उन्हें जो समय दिया गया था, वह बहुत कम था और बहुत देर हो चुकी थी।

फिर भी अपने संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं को एकजुट किया और मुंबई कांग्रेस में पहचान की राजनीति को समाप्त कर दिया, इस उम्मीद में कि पार्टी एक बार फिर अपने बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक रूप से समावेशी आदर्शो पर लौटेगी।

बयान में कहा गया है कि उनके नेतृत्व में पार्टी ने मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-शिवसेना के गठबंधन को निर्णायक टक्कर दी।

इसमें कहा गया, “अपने स्वयं के चुनाव अभियान सहित कई बाधाओं के बावजूद, देवड़ा ने लोकसभा उम्मीदवारों की मदद की, ताकि एक मजबूत लड़ाई पेश की जा सके।”

देवड़ा ने दोहराया कि वह “हमेशा एक विश्वसनीय और साधन संपन्न सिपाही के रूप में पार्टी की सेवा के लिए उपलब्ध हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तत्पर हैं।”

उन्होंने कहा कि 2019 के परिणामों के बाद से राजनीतिक वास्तविकताओं में बदलाव आया है और सभी को अपनी भूमिकाओं के लिए तैयार होना होगा, जो समय की मांग है।

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