सऊदी अरब के रूप में चीन-पाकिस्‍तान को मिला नया भागीदार, खर्च करेगा 50 अरब डॉलर

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रियाद – सऊदी अरब, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा “सीपीईसी” परियोजना में नया भागीदार बन गया है।

सऊदी अरब सीपीईसी परियोजना में सड़क, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं पर 50 अरब डॉलर निवेश करेगा। इस निवेश को लेकर पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच समझौता हो गया है। मीडिया के हवाले से दोनों पक्षों के बीच पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर “पीओके” और खैबर पख्तूनख्वा में स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों की परियोजनाओं में निवेश को लेकर सहमति बन चुकी है।

सऊदी अरब इसमें करीब 1.61 करोड़ डॉलर का निवेश करेगा।

सऊदी फंड फॉर डेवलपमेंट के अध्यक्ष अहमद अकील अल खतीब की पाकिस्तान यात्रा के दौरान इन समझौतों पर सऊदी राजदूत और पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने दस्तखत किए। अहमद अकील अल खतीब के साथ छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान की यात्रा पर गया है।

सूत्रों के अनुसार सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान के सहयोगी बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के पाकिस्तान यात्रा पर हैं। इस समझौते से भीषण नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सउदी अरब से अरबों डॉलर का पैकेज मिलने की संभावना बनी है।

सऊदी अरब ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में एक विश्वविद्यालय को शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुल्ला अजीज परिसर को संवारने के लिए एक करोड़ डॉलर का अनुदान दिया है।

सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा ये समझौते प्रधानमंत्री इमरान खान की हाल की सऊदी अरब की यात्रा के दौरान हुई सहमति के अनुरुप है।सीपीईसी के तहत सड़क, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण से संबंधित समझौते के बारे में मंत्री ने कहा कि तीन अनुदान समझौतों पर दस्तखत के साथ पहला कदम उठाया गया है। यह सकारात्मक कदम है और दोनों देशों के बीच संबंधों के शुभ संकेत है।

सीपीईसी अरबों डॉलर के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की महत्वपूर्ण परियोजना है।

गौरतलब है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह अहम परियोजना है। जिसका लक्ष्य चीन की वित्तपोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से दुनियाभर में उसका प्रभाव बढ़ाना है। भारत ने सीपीईसी का विरोध किया है क्योंकि यह पीओके से गुजरता है।

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