सोशल मीडिया- हाजिर जवाब नेता के रूप में उभर रहे हैं राहुल गांधी

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नई दिल्ली – कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अब राजनीति और सोशल माडिया के रंग में रंगने लगे हैं। राजनीति में राहुल गांधी को अक्सर ‘पप्पू’ कहकर उनका मजाक उड़ाया जाता है। लिहाजा, राहुल अपनी छवि बदलने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं और अपने 84.1 लाख फॉलोअरों के लिए व्यंग्य से भरे ट्वीट्स के माध्यम से वह एक हाजिर जवाब नेता के रूप में उभरे हैं। जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आगामी चुनावों में कुछ नुकसान पहुंचा सकते हैं, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनावों में भी उनके ट्वीट्स ने उनके विरोधियों को नुकसान पहुंचाया था।


सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना में कम फॉलोअर होने के बावजूद अंतरिम बजट के दौरान राहुल गांधी के ट्वीट्स ज्यादा रीट्वीट किए गए।

31 जनवरी से 3 फरवरी के बीच की चार दिनों की अवधि के ट्विटर के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। राहुल गांधी के जिस ट्वीट को 12,000 बार से ज्यादा रीट्वीट किया गया, उसमें उन्होंने लिखा है, ‘आपकी पांच सालों की अक्षमता और अहंकार ने हमारे किसानों के जीवन को नष्ट कर दिया है।

उन्हें प्रतिदिन 17 रुपये देना उनका और उनके काम का अपमान है।

यह ट्वीट हैशटैग ‘आखिरी जुमला बजट’ के साथ किया गया था, जिसमें अंतरिम बजट में दो एकड़ तक की जमीन रखनेवाले सभी किसानों को 6,000 रुपये सालाना की मदद देने की घोषणा की गई थी। राहुल गांधी के ट्वीट के जवाब में भाजपा की तरफ से ट्वीट किया गया, ‘जैसा कि अपेक्षित था, आपने बजट की एक बात नहीं समझी।’ इस ट्वीट को 9,000 बार रीट्वीट किया गया। राहुल गांधी के ट्वीट की तुलना में, मोदी के अंतरिम बजट के दिन किए गए ट्वीट को 7,000 से ज्यादा बार रीट्वीट किया गया। मोदी के माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफार्म पर 4.54 करोड़ फॉलोअर्स हैं।

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक कांग्रेसी नेता ने बताया कि राहुल गांधी के पोस्ट्स सोशल मीडिया पर अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि मुख्यधारा की मीडिया ‘मोदी-समर्थक’ और कांग्रेस अध्यक्ष विरोधी है। सूत्र ने कहा, ‘जैसा कि ट्वीट्स के कॉन्टेट को अकसर तुरंत वॉट्सऐप पर साझा किया जाता है, जिसकी ग्रामीण इलाकों में व्यापक पहुंच है।

ऐसे में राहुल के मेसेजेस का ज्यादा से ज्यादा रीट्वीट होना कांग्रेस के लिए अच्छी खबर है।

कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिजिटल कम्यूनिकेशंस प्रमुख दिव्या स्पंदना के मुताबिक, ‘विभिन्न सोशल मीडिया से जुड़ाव को नापना बेहतर पैरामीटर है, बजाए फॉलोअर्स की संख्या को देखने के।’ सोशल मीडिया विशेषज्ञ अनूप मिश्रा का कहना है कि रिट्वीट की ज्यादा संख्या से यह पता नहीं चल सकता है कि वह व्यक्ति ‘अधिक प्रभावशाली’ है।

मिश्रा ने कहा, ‘इससे संकेत मिलता है कि लोगों की रुचि उस खास विषय में है, जिसे वे रीट्वीट कर रहे हैं।’ अब प्रियंका गांधी वाड्रा (जिन्हें हाल में ही पूर्वी यूपी का प्रभारी नियुक्त किया गया है) भी सोशल मीडिया पर आनेवाली हैं। ऐसे में बीजेपी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भाई-बहन की जोड़ी से लड़ने के लिए और मेहनत करनी पड़ सकती है।

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