Rajnath Singh ने चीन के साथ सीमा पर चल रहे गतिरोध की समीक्षा की

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Rajnath Singh ने चीन के साथ सीमा पर चल रहे गतिरोध की समीक्षा की

Khabar aaj ki रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठक करते हुए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति और सुरक्षा को लेकर चर्चा की।

भारत और चीन के बीच सीमा पर गतिरोध बना हुआ है और इसे खत्म करने के लिए अभी तक हुई वार्ता से भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। भारत को सीमा को सु²ढ़ करने के लिए तीन अतिरिक्त संरचनाओं (फॉर्मेशन) की जरूरत है।

भारत को कम से कम 5,000 निवास स्थान (हैबिटैट) बनाने हैं और सितंबर में आम तौर पर दुर्गम इलाकों में निर्माण बंद हो जाता है।

सिंह ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा स्थिति पर डोभाल के साथ रावत और तीन सेवा प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक की, जहां चीनी सैनिक अभी भी डेरा डाले हुए हैं।

एक सूत्र ने कहा, यह बैठक साउथ ब्लॉक में लगभग डेढ़ घंटे चली।

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया बंद हो गई है, क्योंकि भारत और चीन के बीच हुई वार्ता में ठोस समाधान नहीं निकल पाया है और दोनों पक्षों के बीच सहमति वार्ता सिरे नहीं चढ़ सकी है। चीन ने पैंगोंग त्सो और देपसांग के उत्तर में अपनी वर्तमान सैन्य स्थिति से पीछे हटने से इनकार कर दिया है।

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) मई के शुरूआत से ही नई किलेबंदी करने में जुटी हुई है और उसने फिंगर चार से फिंगर आठ तक के क्षेत्र में अवैध रूप से यथास्थिति बदलने का प्रयास किया है।

यही नहीं विस्तारवादी सोच के लिए जाना जाने वाला चीन लिपुलेख को लेकर भी नेपाल को भड़का रहा है। नई दिल्ली और काठमांडू के बीच सीमा विवाद में चीन का बड़ा हाथ बताया जा रहा है। लिपुलेख भारत, नेपाल और चीन के बीच त्रि-जंक्शन है, जो कालापानी घाटी में स्थित है।

चीन ने विभिन्न स्थानों पर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदल दिया है। भारत ने इस पर आपत्ति जताई है और वह चीन के साथ सभी स्तरों पर मामले को उठा रहा है।

दोनों देशों की सेनाएं एलएसी पर पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी के पास अभूतपूर्व रूप से कई बिंदुओं पर तीन महीने से अधिक समय से आमने-सामने है।

बैठक के दौरान, यह भी चर्चा की गई कि बीजिंग ने 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास के क्षेत्रों में सैन्य टुकड़ी और निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।

भारत को यह भी पता चला है कि चीन ने एलएसी के तीन सेक्टरों – पश्चिमी (लद्दाख), मध्य (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश) और पूर्वी (सिक्किम, अरुणाचल) में सेना, तोपखाने और बख्तरबंद वाहन तैनात किए हैं।

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