मजबूत क्षेत्रीय प्रभावशाली नेताओं को मिलेगी निगम मंडल की कमान

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मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पार्टी कार्यकर्ताओं की निगम मंडलों

भोपाल – मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पार्टी कार्यकर्ताओं की निगम मंडलों में नियुक्ति को लेकर गाइड लाइन तय कर ली है।

पंद्रह सालों तक संगठन में संघर्ष करने वाले नेताओं क्षेत्रीय प्रभाव और टिकट से वंचित हुए चेहरों को वरीयता दी जाएगी। मंत्रियों में अनुशासन का डंडा चलाने को लेकर भी गाइड लाइन बनाई गई है। यह गाइडलाइन मुख्यमंत्री कमल नाथ और प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी दीपक बाबरिया की बुधवार देर रात सीएम हाउस में हुई संयुक्त बैठक में बनाई गई है। बैठक का मुख्य फोकस निगम मंडलों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की नियुक्ति और मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक लगाने पर था। निगम-मंडलों में नियुक्ति का खाका लगभग तैयार कर लिया गया है। 3 से 4 बार में निगम-मंडलों की नियुक्ति टुकड़ों टुकड़ों में होगी।

सभी क्षेत्रों को साधेगी कांग्रेस तय किया गया है कि राजनीतिक नियुक्तियों में सभी प्रदेश के हर क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं को मौका दिया जाएगा। खास बात यह है कि जो नेता पहले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा में टिकट के दावेदार थे, उन्हें भी प्राथमिकता दी जायेगी।
मंत्रियों पर चलेगा अनुशासन का डंडा

मंत्रियों में अनुशासन का डंडा चलाने को लेकर भी गाइड लाइन बनाई गई है। बैठक का मुख्य फोकस निगम मंडलों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की नियुक्ति और मंत्रियों की नियंत्रण करने का है।

पार्टी के लिए सबसे बड़ी चिंता मंत्रियों और विधायकों की आए दिन होने वाली बयानबाजी है।

इससे सरकार और पार्टी दोनों की छवि को खासा नुकसान पहुंच रहा है। कांग्रेस सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्री डा. गोविंद सिंह के रेत माफिया के हावी होने, बयान वन मंत्री उमंग सिंगार और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय के बीच चले तीर से भी पार्टी को नुकसान पहुंचा है। सिंघार के मुद्दे की पार्टी आलाकमान ने रिपोर्ट बुलाई थी। रिपोर्ट बुलाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने अनुशासन बनाए रखने की नसीहत दी है। कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह का अपने बड़े भाई व सांसद दिग्विजय सिंह के बंगले में धरना देने को भी पार्टी हित में नहीं माना गया है। लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के कई बयानों पर नाराजगी जताई गई।

मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा


निगम मंडलों में नियुक्तियों के अलावा कमलनाथ व बावरिया के बीच अन्य राजनीतिक विषयों पर भी बातचीत चर्चा हुई है। जैसे मंत्रिमंडल सदस्यों के लिए भी आचार संहिता अथवा गाइडलाइन बनाने पर विचार हुआ सरकार एक मत और एक राय से चलती दिखाई पड़े। कुछ मुददों पर मंत्रियों के विरोधाभाषी बयानों का बैठक मे चर्चा हुई । बावरिया ने कहा कि मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा सरने पर सहमति बनी है। भी कोई व्यवस्था होना चाहिए और परफारमेंस के आधार पर ही आगे मंत्रियों के बारे में निर्णय होना चाहिए।

योग्यता का पैमाना, देखी जाएगी पंद्रह साल की सक्रियता


बैठक में तय हुआ कि ऐसे नेताओं निगम मंडलों में प्राथमिकता दी जाए जो कांगे्रस के विपक्ष में रहने के दौरान 15 साल सक्रिय रहे।
आंदोलन एवं संगठन की गतिविधियों में संबंधित नेता की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर जिला कांगे्रस से रिपोर्ट बुलाई जाएगी। देखा जाएगा कि लोस और विस चुनावों के दौरान उनकी कैसी भूमिका रही है। उन नेताओं को भी लाभ मिलेगा जिन्हें विस चुनाव के दौरान पार्टी के सत्ता में आने पर महत्वपूर्ण पद देने करने का आश्वासन दिया गया था।

क्षेत्रीय जातीय व गुटीय संतुलन साधने पर भी जोर


बावरिया ने सीएम से कहा कि क्षेत्रीय, गुटीय एवं जातीय संतुलन जरूरी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ क्षेत्र विशेष या नेता विशेष से जुड़े लोगों को नियुक्तियों में प्राथमिकता नहीं मिलना चाहिए। मप्र के प्रत्येक संभाग का
संतुलन दिखाई पडऩा चाहिए, संगठन को प्रदेश स्तर पर मजबूतबनाया दा सके। ताकि तय किया गया कि नियुक्तियों में हर क्षेत्र का ख्याल रखा जाएगा। प्रत्येक जाति वर्ग को,निगम-मंडलों में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। हर प्रमुख नेता से सक्रिय नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के नाम लिए जाएंगे।

पीसीसी चीफ पर भी चर्चा
कमलनाथ एवं बावरिया के बीच निगम मंडलों में नियुक्तियों, मंत्रियों के लिए गाइडलाइन तथा अन्य विषयों पर भी अनौपचारिक बातचीत हुई। दोनों के बीच मंत्रिमंडल विस्तार और नए प्रदेशाध्यक्ष को लेकर भी बातचीत हुई है।

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